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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 3
राज-योगः समाधिश्छ उन्मनी छ मनोन्मनी | अमरत्वं लयस्तत्त्वं शून्याशून्यं परं पदम ||
राजयोगी, समाधि, उन्मनी, मौनमणि, अमरत्व, लय, तत्व, शून्य, आसुन्या, परमा पाद
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