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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 23
मनो यत्र विलीयेत पवनस्तत्र लीयते | पवनो लीयते यत्र मनस्तत्र विलीयते |
जब मन लीन हो जाता है तो श्वास कम हो जाती है और प्राण के संयमित होने पर मन लीन हो जाता है।
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