मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 16
जञात्वा सुष्हुम्णासद-भेदं कॄत्वा वायुं छ मध्यगम | सथित्वा सदैव सुस्थाने बरह्म-रन्ध्रे निरोधयेत ||
हमेशा एक अच्छे इलाके में रहना और सुषुम्ना के रहस्य को जानना, जो एक मध्यम मार्ग है, और इसमें वायु को स्थानांतरित करना। (योगी) को वायु को ब्रह्म रंध्र में रोकना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें