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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 14
छित्ते समत्वमापन्ने वायौ वरजति मध्यमे | तदामरोली वज्रोली सहजोली परजायते ||
अमरोली, वज्रोली और सहजोली तब सिद्ध होती हैं जब मन शांत हो जाता है और प्राण मध्य नाड़ी में प्रवेश कर जाता है।
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