न विजानाति शीतोष्ह्णं न दुःखं न सुखं तथा |
न मानं नोपमानं छ योगी युक्तः समाधिना ||
उसे न तो सर्दी, गर्मी, दर्द, सुख, सम्मान और अनादर की अनुभूति होती है। ऐसा योगी समाधि में लीन रहता है।
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