छित्तं न सुप्तं नोजाग्रत्स्मॄति-विस्मॄति-वर्जितम |
न छास्तमेति नोदेति यस्यासौ मुक्त एव सः ||
जिसका मन न सोता है, न जागता है, न स्मरण करता है, न स्मृतिहीन होता है, न मिटता है और न ही प्रकट होता है, वह मुक्त है।
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