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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 108
खाद्यते न छ कालेन बाध्यते न छ कर्मणा | साध्यते न स केनापि योगी युक्तः समाधिना ||
वह मृत्यु से भस्म नहीं होता, अपने कर्मों से बंधा नहीं होता। समाधि में लगे हुए योगी पर किसी का वश नहीं होता।
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