अमरीं यः पिबेन्नित्यं नस्यं कुर्वन्दिने दिने |
वज्रोलीमभ्यसेत्सम्यक्सामरोलीति कथ्यते ||
जो अमरोली पीता है, नित्य सूंघता है और वज्रोली का अभ्यास करता है, वह अमरोली का अभ्यासी कहलाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।