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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 95
अयं योगः पुण्यवतां धीराणां तत्त्व-दर्शिनाम | निर्मत्सराणां वै सिध्येन्न तु मत्सर-शालिनाम ||
यह योग आलस्य से रहित साहसी पण्डितों द्वारा सिद्ध होता है, आलस्य से नहीं हो सकता।
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