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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 92
अथ सहजोलिः सहजोलिश्छामरोलिर्वज्रोल्या भेद एकतः | जले सुभस्म निक्ष्हिप्य दग्ध-गोमय-सम्भवम ||
सहजोली और अमरोली वज्रोल के ही विभिन्न प्रकार हैं। जले हुए गोबर की राख को पानी में मिलाकर लेना चाहिए।
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