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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 90
छित्तायत्तं नॄणां शुक्रं शुक्रायत्तं छ जीवितम | तस्माछ्छुक्रं मनश्छैव रक्ष्हणीयं परयत्नतः ||
मनुष्य का बिंदु मन के अधीन है, और जीवन बिंदु पर निर्भर है। अत: मन और शरीर की हर तरह से रक्षा करनी चाहिए।
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