मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 9
गोपनीयं परयत्नेन यथा रत्न-करण्डकम | कस्यछिन्नैव वक्तव्यं कुल-सत्री-सुरतं यथा ||
इन मुद्राओं को हर तरह से गुप्त रखना चाहिए, जैसे कि एक व्यक्ति अपने गहनों के डिब्बे को रखता है, और किसी को भी किसी को नहीं बताना चाहिए, जैसे पति और पत्नी अपने व्यवहार को गुप्त रखते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें