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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 79
ऊर्ध्व-नाभेरधस्तालोरूर्ध्वं भानुरधः शशी | करणी विपरीताखा गुरु-वाक्येन लभ्यते ||
ऊपरी नाभि, निचली हथेली, ऊपरी सूर्य, निचला चंद्रमा गुरु-शब्द की विपरीत शाखा से कर्ता की प्राप्ति होती है |
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