मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 77
यत्किंछित्स्रवते छन्द्रादमॄतं दिव्य-रूपिणः | तत्सर्वं गरसते सूर्यस्तेन पिण्डो जरायुतः ||
सोम (चंद्र) से निकलने वाले दैवीय गुणों से युक्त संपूर्ण अमृत सूर्य द्वारा निगल लिया जाता है; और इसके कारण शरीर बूढ़ा हो जाता है। इसके उपाय के लिए उत्तम साधनों से सूर्य के खुलने से बचा जाता है। इसे गुरु के निर्देशों से सबसे अच्छी तरह सीखा जा सकता है; लेकिन एक लाख चर्चाओं से भी नहीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें