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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 66
अपान ऊर्ध्वगे जाते परयाते वह्नि-मण्डलम | तदानल-शिखा दीर्घा जायते वायुनाहता ||
ऊपर जाकर, अपान अग्नि क्षेत्र में प्रवेश करता है, अर्थात पेट। इस प्रकार हवा से टकराकर आग की लौ लंबी हो जाती है।
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