अपान-पराणयोरैक्यं कष्हयो मूत्र-पुरीष्हयोः |
युवा भवति वॄद्धो|अपि सततं मूल-बन्धनात ||
प्राण और अपान की शुद्धि से मूत्र और मल कम हो जाता है। मूलबंध के लगातार अभ्यास से बूढ़ा भी जवान हो जाता है।
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