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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 63
गुदं पार्ष्ह्ण्या तु सम्पीड्य वायुमाकुनछयेद्बलात | वारं वारं यथा छोर्ध्वं समायाति समीरणः ||
एड़ी को मलद्वार से अच्छी तरह दबाते हुए वायु को बार-बार तब तक खींचे जब तक वह (वायु) ऊपर न चली जाए।
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