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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 61
अथ मूल-बन्धः पार्ष्ह्णि-भागेन सम्पीड्य योनिमाकुनछयेद्गुदम | अपानमूर्ध्वमाकॄष्ह्य मूल-बन्धो|अभिधीयते ||
योनी (मूलाधार) को एड़ी से दबाने पर गुदा ऊपर की ओर सिकुड़ जाता है। अपान को इस प्रकार खींचकर मूल बंध बनाया जाता है।
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