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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 60
सर्वेष्हामेव बन्धानां उत्तमो हयुड्डीयानकः | उड्डियाने दॄढे बन्धे मुक्तिः सवाभाविकी भवेत ||
सभी बंधों में उड्डियान सर्वश्रेष्ठ है; क्‍योंकि इसे मजबूती से बांधने से अनायास ही मुक्ति मिल जाती है।
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