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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 41
छित्तं छरति खे यस्माज्जिह्वा छरति खे गता | तेनैष्हा खेछरी नाम मुद्रा सिद्धैर्निरूपिता ||
कट आकाश में फिसल गया जिससे जीभ फिसलकर आकाश में चली गई, इसलिए खेचरी नामक मुद्रा को सिद्धों ने परिभाषित किया है |
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