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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 17
कष्हय-कुष्ह्ठ-गुदावर्त-गुल्माजीर्ण-पुरोगमाः | तस्य दोष्हाः कष्हयं यान्ति महामुद्रां तु यो|अभ्यसेत ||
सेवन, कोढ़, प्रलेप्सस एनी, शूल और अजीर्ण के कारण होने वाले रोग - ये सभी अनियमितताएं इस महा मुद्रा के अभ्यास से दूर हो जाती हैं।
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