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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 127
मारुतस्य विधिं सर्वं मनो-युक्तं समभ्यसेत | इतरत्र न कर्तव्या मनो-वॄत्तिर्मनीष्हिणा ||
वायु सम्बन्धी सभी साधनाएँ एकाग्रचित्त होकर करनी चाहिए। एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपने मन को भटकने नहीं देना चाहिए।
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