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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 122
कुण्डलीं छालयित्वा तु भस्त्रां कुर्याद्विशेष्हतः | एवमभ्यस्यतो नित्यं यमिनो यम-भीः कुतः ||
कुण्डली हिलाने के बाद खूब भस्त्र करना चाहिए। इस तरह के अभ्यास से उसे मृत्यु के देवता से कोई भय नहीं रहता।
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