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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 120
येन संछालिता शक्तिः स योगी सिद्धि-भाजनम | किमत्र बहुनोक्तेन कालं जयति लीलया ||
योगी, जो शक्ति को स्थानांतरित करने में सक्षम है, सफलता का पात्र है। अधिक कहना व्यर्थ है, इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि वह मृत्यु को खेल-खेल में जीत लेता है।
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