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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 115
वज्रासने सथितो योगी छालयित्वा छ कुण्डलीम | कुर्यादनन्तरं भस्त्रां कुण्डलीमाशु बोधयेत ||
योगी, वज्र-आसन के साथ बैठे और कुण्डली को हिलाकर, कुण्डली को शीघ्र जगाने के लिए भस्त्रिका करें।
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