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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 103
देह-सिद्धिं छ लभते वज्रोल्य-अभ्यास-योगतः | अयं पुण्य-करो योगो भोगे भुक्ते|अपि मुक्तिदः ||
वज्रोल्य के अभ्यास से वह शरीर सिद्धि को प्राप्त करता है। यह मेधावी योग सुख में भोगा जाता है|मुक्तिदायक भी है।
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