मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 3 • श्लोक 10
अथ महा-मुद्रा पाद-मूलेन वामेन योनिं सम्पीड्य दक्ष्हिणाम | परसारितं पदं कॄत्वा कराभ्यां धारयेद्दॄढम ||
बायें पैर की एड़ी से योनी (मूलाधार) को दबाते हुए दाहिने पैर को आगे की ओर फैलाते हुए उसके पैर के अंगूठे और पहली अंगुली को पकड़ लेना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें