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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 77
कुम्भक-पराण-रोधान्ते कुर्याछ्छित्तं निराश्रयम | एवमभ्यास-योगेन राज-योग-पदं वरजेत ||
कुम्भक की समाप्ति पर मन को विश्राम देना चाहिए। इस तरह से अभ्यास करने से व्यक्ति राज योग की स्थिति में आ जाता है (प्राप्त करने में सफल होता है)।
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