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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 76
हठं विना राजयोगो राज-योगं विना हठः | न सिध्यति ततो युग्ममानिष्ह्पत्तेः समभ्यसेत ||
हठ योग के बिना राज योग में सफलता नहीं, और राज योग के बिना हठ योग में सफलता नहीं। इसलिए इन दोनों का अच्छी तरह से अभ्यास करना चाहिए, जब तक कि पूर्ण सफलता प्राप्त न हो जाए।
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