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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 66
कुण्डली बोधकं कष्हिप्रं पवनं सुखदं हितम | बरह्म-नाडी-मुखे संस्थ-कफाद्य-अर्गल-नाशनम ||
यह कुण्डलिनी को शीघ्र जगाता है, तंत्र को शुद्ध करता है, आनंद देता है, और लाभकारी है। यह कफ और ब्रह्म नाडी के प्रवेश द्वार पर जमा हुई अशुद्धियों को नष्ट करता है।
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