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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 61
यथा लगति हॄत-कण्ठे कपालावधि स-सवनम | वेगेन पूरयेछ्छापि हॄत-पद्मावधि मारुतम ||
उसे बलपूर्वक खींचकर, शोर करके और कंठ, छाती और सिर को स्पर्श करके हृदय-कमल तक भरना चाहिए।
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