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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 51
अथ उज्जायी मुखं संयम्य नाडीभ्यामाकॄष्ह्य पवनं शनैः | यथा लगति कण्ठात्तु हॄदयावधि स-सवनम ||
नाडी (स्वरयंत्र) के छिद्र को बंद करके हवा को इस तरह खींचना चाहिए कि वह गले से छाती तक छूती हुई जाए और गुजरने पर शोर करे।
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