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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 46
अधस्तात्कुनछनेनाशु कण्ठ-सङ्कोछने कॄते | मध्ये पश्छिम-तानेन सयात्प्राणो बरह्म-नाडिगः ||
नीचे (मूल बंध) से खींचकर और गले (जालंधर बंध) को सिकोड़कर और शरीर के सामने के हिस्से (यानी, पेट) के मध्य भाग को पीछे खींचकर, प्राण ब्रह्म नाडी (सुम्ना) में जाता है।
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