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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 37
पराणायामैरेव सर्वे परशुष्ह्यन्ति मला इति | आछार्याणां तु केष्हांछिदन्यत्कर्म न संमतम ||
कुछ आचार्य किसी अन्य अभ्यास की वकालत नहीं करते हैं, उनका मत है कि प्राणायाम के अभ्यास से सभी अशुद्धियाँ सूख जाती हैं।
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