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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 35
अथ कपालभातिः भस्त्रावल्लोह-कारस्य रेछ-पूरौ ससम्भ्रमौ | कपालभातिर्विख्याता कफ-दोष्ह-विशोष्हणी ||
लोहार की धौंकनी की भाँति अति शीघ्र श्वास-प्रश्वास क्रिया करने पर यह कफ की अधिकता के समस्त विकारों को सुखा देती है और इसे कपालभाति कहते हैं।
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