मन्दाग्नि-सन्दीपन-पाछनादि-सन्धापिकानन्द-करी सदैव |
अशेष्ह-दोष्ह-मय-शोष्हणी छ हठ-करिया मौलिरियं छ नौलिः ||
यह अपच को दूर करता है, भूख और पाचन को बढ़ाता है, और सृजन की देवी के समान है, और खुशी का कारण बनता है। यह समस्त विकारों को सुखा देता है। हठयोग में यह नौली एक उत्तम व्यायाम है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।