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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 3
यावद्वायुः सथितो देहे तावज्जीवनमुछ्यते | मरणं तस्य निष्ह्क्रान्तिस्ततो वायुं निरोधयेत ||
जब तक वायु शरीर में रहती है, तब तक उसका नाम प्राण है। मृत्यु हवा से बाहर निकलने में होती है। इसलिए सांस को रोकना जरूरी है।
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