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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 2 • श्लोक 27
गुल्म-पलीहोदरं छापि वात-पित्त-कफोद्भवाः | बस्ति-कर्म-परभावेण कष्हीयन्ते सकलामयाः ||
इस बस्ती कर्म के अभ्यास से वात (वायु), पित्त और कफ (बलगम) के विकारों से उत्पन्न होने वाले शूल, बढ़े हुए प्लीहा और जलोदर सभी ठीक हो जाते हैं।
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