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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 67
युवो वॄद्धो|अतिवॄद्धो वा वयाधितो दुर्बलो|अपि वा | अभ्यासात्सिद्धिमाप्नोति सर्व-योगेष्ह्वतन्द्रितः ||
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