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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 38
मेण्ढ्रादुपरि विन्यस्य सव्यं गुल्फं तथोपरि | गुल्फान्तरं छ निक्ष्हिप्य सिद्धासनमिदं भवेत ||
यह सिद्धासन बाईं एड़ी को मेध्र (पुरुष अंग के ऊपर) पर रखकर और फिर दाईं एड़ी को उस पर रखकर भी किया जाता है।
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