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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 33
हरति सकल-रोगानाशु गुल्मोदरादीन अभिभवति छ दोष्हानासनं शरी-मयूरम | बहु कदशन-भुक्तं भस्म कुर्यादशेष्हं जनयति जठराग्निं जारयेत्काल-कूटम ||
यह आसन शीघ्र ही समस्त रोगों का नाश करता है, उदर विकार दूर करता है तथा कफ, पित्त और वायु की अनियमितता से उत्पन्न होने वाले विकारों को भी अधिक मात्रा में ग्रहण किये हुए अस्वास्थ्यकर भोजन को पचाता है, भूख को बढ़ाता है और अत्यन्त घातक विष का नाश करता है।
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