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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 32
धरामवष्ह्टभ्य कर-दवयेन तत-कूर्पर-सथापित-नाभि-पार्श्वः | उछ्छासनो दण्डवदुत्थितः खे मायूरमेतत्प्रवदन्ति पीठम ||
दोनों हाथों की हथेलियों को जमीन पर रखें और नाभि को दोनों कोहनियों पर रखें और इस प्रकार संतुलन बनाते हुए शरीर को पीछे की ओर लकड़ी की तरह तानें। इसे मयूरा-आसन कहते हैं।
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