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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 27
पादाङ्गुष्ह्ठौ तु पाणिभ्यां गॄहीत्वा शरवणावधि | धनुराकर्ष्हणं कुर्याद्धनुर-आसनमुछ्यते ||
दोनों हाथों से पैरों के पंजों को पकड़कर धनुष की तरह शरीर को खींचकर कानों तक ले जाने से धनुरासन होता है।
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