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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 22
सव्ये दक्ष्हिण-गुल्कं तु पॄष्ह्ठ-पार्श्वे नियोजयेत | दक्ष्हिणे|अपि तथा सव्यं गोमुखं गोमुखाकॄतिः ||
दाहिने टखने को बायीं ओर और बायें टखने को दायीं ओर रखने से गाय के समान गोमुखासन होता है।
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