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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 1 • श्लोक 14
एवं विधे मठे सथित्वा सर्व-छिन्ता-विवर्जितः | गुरूपदिष्ह्ट-मार्गेण योगमेव समभ्यसेत ||
ऐसे कमरे में बैठकर सभी चिंताओं से मुक्त होकर उसे अपने गुरु के निर्देशानुसार योग का अभ्यास करना चाहिए।
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