मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 9
अवकीर्णः सुगुप्तश्च न वाचा ह्यप्रियं वदेत्। मृदुः स्यादप्रतिक्रूरो विस्त्रब्धः स्यादकत्थनः ॥
वह सरल वेश में रहे, अपने आचरण को भली-भाँति संयमित रखे और वाणी से कभी अप्रिय वचन न बोले। वह मृदुभाषी, अक्रूर, निष्कपट तथा डींग मारने से रहित हो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हारीतगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हारीतगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें