प्रदक्षिणं च सव्यं च ग्राममध्ये च नाचरेत्।
भैक्षचर्यामनापन्नो न गच्छेत् पूर्वकेतितः ॥
वह ग्राम के भीतर न तो प्रदक्षिणा करता हुआ और न ही इधर-उधर उद्देश्यहीन घूमता हुआ विचरण करे। भिक्षा वृत्ति को छोड़कर किसी के यहाँ पहले से निमन्त्रित होकर भोजन के लिये न जाए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हारीतगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हारीतगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।