प्रदक्षिणं च सव्यं च ग्राममध्ये च नाचरेत्।
भैक्षचर्यामनापन्नो न गच्छेत् पूर्वकेतितः ॥
गाँव या जनसमुदाय में दायें-बायें न करे, किसी का पक्ष-विपक्ष नः करे तथा भिक्षावृत्ति को छोड़कर किसी के यहाँ पहले से निमन्त्रित होकर भोजन के लिये न जाय।
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