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हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 8
प्रदक्षिणं च सव्यं च ग्राममध्ये च नाचरेत्। भैक्षचर्यामनापन्नो न गच्छेत् पूर्वकेतितः ॥
वह ग्राम के भीतर न तो प्रदक्षिणा करता हुआ और न ही इधर-उधर उद्देश्यहीन घूमता हुआ विचरण करे। भिक्षा वृत्ति को छोड़कर किसी के यहाँ पहले से निमन्त्रित होकर भोजन के लिये न जाए।
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