मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 7
अतिवादांस्तितिक्षेत नाभिमन्येत कञ्चन । क्रोध्यमानः प्रियं ब्रूयादाकुष्टः कुशलं वदेत् ॥
वह दूसरों के कटु वचनों को सहन करे और किसी का अपमान न करे। क्रोधित किए जाने पर भी प्रिय वचन बोले, और यदि कोई उसका अपशब्दों से अपमान करे, तब भी उसके कल्याण की ही बात कहे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हारीतगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हारीतगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें