मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 6
न हिंस्यात् सर्वभूतानि मैत्रायणगतश्चरेत् । नेदं जीवितमासाद्य वैरं कुर्वीत केनचित् ॥
वह किसी भी प्राणी को हानि न पहुँचाए और सभी के प्रति मित्रभाव रखकर जीवन व्यतीत करे। यह मनुष्य जीवन प्राप्त करके उसे किसी के साथ वैर नहीं रखना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हारीतगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हारीतगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें