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हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 23
अभयं सर्वभूतेभ्यो दत्त्वा यः प्रव्रजेद् गृहात् । लोकास्तेजोमयास्तस्य तथानन्त्याय कल्पते ॥ ॥ इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि हारीतगीता सम्पूर्णा ॥
जो पुरुष अपने गृह का त्याग करते समय समस्त प्राणियों को अभय प्रदान करके संन्यास ग्रहण करता है, उसके लिए तेजोमय लोक प्राप्त होते हैं और वह अनन्त पद का अधिकारी बनता है। ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत के शान्तिपर्व के मोक्षधर्मपर्व में हारीतगीता समाप्त हुई
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